जानिए सॅटॅलाइट(satellite) किसे कहते है? | सॅटॅलाइट कैसे काम करते है साथ ही सॅटॅलाइट कितने प्रकार के होते है?

सरल शब्दों में जानिए सॅटॅलाइट(satellite) किसे कहते है? | How satellite works? | satellite(उपग्रह) कितने प्रकार के होते है?|about satellite in hindi 

क्या आपको भी नहीं पता है की आखिर सॅटॅलाइट(satellite) किसे कहते है? तो बिलकुल भी चिंता(tension) न करे आपके सवाल का जवाब इसी article में मिल जाएगाऔर इसके अलावा और भी कई सारे रोचक तथ्यों के बारे में जानने का मौका मिलेगा तो कृप्या करके article को पूरा read जरूर करे और अगर लेख पसंद आए तो share भी जरूर कर सकते हो

    about satellite in hindi सॅटॅलाइट(satellite) किसे कहते है?
    सॅटॅलाइट किसे कहते हे? 
     

    Q.सॅटॅलाइट(satellite) किसे कहते है?

    विज्ञान की दुनिया में सॅटॅलाइट किसी ऐसी छोटी चीज को कहते है जो किसी दुसरे बड़े चीज के गुरुत्वाकर्षण के कारण वो छोटी चिज उस बडी चीज का चक्कर लगाती है EX. उदाहरन के तौर पर चाँद का पृथ्वी का चक्कर लगाना! यहाँ पर हम चाँद को पृथ्वी का सॅटॅलाइट कह सकते है या फिर हमारा सूरज का चक्कर लगाना ये भी एक example हो सकता है

    अब अगर में आपसे बात करू पृथ्वी के आसपास चक्कर लगाने वाले सॅटॅलाइट के बारे में तो ये कुछ खास प्रकार के चुने गए हलकी धातुओं का उपयोग करके बनाए जाते है जिसमे ज्यादातर एल्युमिनियम,टाइटेनियम, और निकल-कैडमियम जैसी वजन में हलकी धातुओ का उपयोग किया जाता हैजिसे आप उपर बताए गए पहले चित्र में देख सकते है

    इन सॅटॅलाइट को उपग्रहों के नाम से भी जाना जाता है ये उपग्रह पृथ्वी की सपाटी से अलग अलग ऊंचाईयो पर उड़ते है जिससे वो अलग अलग तरीको से हमें फायदा पहोचाते है इन यंत्रो का आकार एक छोटे टीवी से लेकर एक बड़े ट्रक जितना होता है

    दोस्तों आज के दौर में सॅटॅलाइट के बिना शायद हम एक पल भी नहीं जी सकते हैअगर में आपसे बात करू इन satellite के बारे तो इनसे पृथ्वी की दुरी काफी अधिक होती है। जिसके कारण कोई भी व्यक्ति इन्हें अपने आँखों से आसानी से नहीं देख पाता और शायद आपको इसके महत्व का भी अंदाजा नहीं होगा फिर भी में बता दू की आज कल की हमारी ये आधुनिक लाइफ स्टाइल में बहुत से ऐसे काम है जो हम बिना सॅटॅलाइट के कर ही नहीं पाएंगे

       जैसे की आप का रोज टी.वि. देखना, अपने मोबाइल फ़ोन को चलाना, GPS के उपयोग से google map पर रस्ते ढूँढना, या फिर आपसे दूर किसी दुसरे शहर में रहने वाले दोस्तों से बाते करना और न जाने कई सारे ऐसे काम है जो बिना सॅटॅलाइट के पॉसिबल ही नहीं है तो आज हमने देखा की सॅटॅलाइट किसे कहते है? अब चलिए आगे बढ़ते हे और जानते की सॅटॅलाइट कैसे काम करते है?

    Q.सॅटॅलाइट कैसे काम करती है?

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    about satellite in hindi 

    about satellite in hindi-जैसे की आप उपर की तस्वीर में देख सकते हो अधिकतर उपग्रहों की डिज़ाइन एक जैसी ही होती है हालाँकि कई बार आपने उसके आजू बाजू दो पंख लगे हुए देखे होंगे दरअसल ये solar-panel होती है जिससे की वो अंतरीक्ष में रह कर भी सौर उर्जा का उपयोग करके कई सालो तक पृथ्वी का चक्कर लगाते है

     इन को इस तरह से डिज़ाइन किया जाता है की जिससे ये बहुत ही हलके होते है और इन्हें स्पेस में भेजना भीआसन हो जाता हे. इन सॅटॅलाइटो के बिच में कई सारे सर्किट लगे हुए होते है और इनमे कुछ खास प्रकार के रिसीवर के साथ साथ ट्रांसमीटर भी लगे हुए होते है जिससे की वो बहुत ही आसानी से माहिती का लेनदेन कर सकते हे.
     इसके आलावा इनमे कई प्रकार के सेंसर भी लगे हुए होते है जैसे की रीमोर्ट कंट्रोल  सेंसर जिससे की हम पृथ्वी पर रह कर भी बहुत ही आसानी से इसकी direction को बदल सकते है या फिर इनके ऑर्बिट भी change कर सकते है

    इसके अलावा ये उस पर भी निर्भर करता है की ये उपग्रह किस काम के लिए भेजा गया है जैसे की अगर वो GPS के लिए है तो उसमे ट्रैकर सिस्टम लगे हुए होते है या फिर अगर हम उससे फोटो खींचना चाहते है तो उसमे कैमरा भी लगे हुए होते है 

    Q.सॅटॅलाइट कितने प्रकार के होते है?

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    अगर आप अंतरीक्ष में से पृथ्वी की ऑर्बिट को देखे तो वहाँ पर एक नहीं बल्कि कई सारे उपग्रह चक्कर लगाते हुए मिल जाएंगे इसका एक कारण ये भी है की सिर्फ एक ही देश के उपग्रह हमारे ऑर्बिट में नहीं है और इन सभी सॅटॅलाइटो का काम भी अलग अलग है जिसकी वजह से उन्हें मुख्य रूप से 3 भागो में विभाजित किया जाता है जैसे की,

    1. Low earth orbit satellite
    2. Medium earth orbit satellite
    3. high eath orbit satellite




    Low earth orbit satellite-नीची कक्षा में उडने वाले उपग्रहों का उपयोग खास करके टेलि कम्यूनिकेशन में होता है ये सॅटॅलाइट पृथ्वी की सपाटी से 400 से लेकर 1000 माइल्स की ऊंचाईयों पर उड़ते है इन सॅटॅलाइटो का उपयोग हम लोग खास करके ईमेल भेजने में या फिर विडियो कॉल करने में करते है इसके साथ ही ये अपनी ऑर्बिट में बहुत ही तेजी से घूमते है और किसी एक जगह पर नहीं टिकते है

    साथ ही नासा के एक रिसर्च की माने तो फ़िलहाल पृथ्वी के आस पास करीब 8000 से भी ज्यादा फुटबाल के आकर से बड़े मेटल और रोकेट के पार्ट्स ऑर्बिट में घूम रहे है। जोकि काफी बुरी बात है हमारे और पृथ्वी के भविष्य के लिए

    Medium earth orbit satellite- इस प्रकार के सॅटॅलाइट अपनी एक निश्चित स्पीड और ऊंचाई पर परिक्रमा करते है जैसे की 10000-20000 km के ऊंचाई पर ये घूमते है इस प्रकार के उपग्रहों का मुख्य काम navigation यानि की हमें google map जैसी सुविधाओ का लाभ उठाने में हमें मदद करती है इनका एक परिक्रमा का समय लगभग 12 घंटे का होता है और ये एक निश्चित समय पर निश्चित जगह से गुजरते है

    high earth orbit satellite- इस प्रकार के उपग्रह पृथ्वी से लगभग 35000 km की ऊंचाई पर घूमते है इनके घुमने की स्पीड 24 घंटे की होती है जिसकी वजह से ये पृथ्वी के साथ ही घूम सकता है और अगर किसी भी जगह की माहिती की जरूरत होती है तो हम उसे उसी जगह पर टिका भी सकते है जैसे की परमाणु मूवी में अमेरिका ने हम पर नजर रखी थी


    Q.सॅटॅलाइट निचे क्यों नहीं गिरते है?

    "सॅटॅलाइट का निचे नहीं गिरना" विज्ञान के एक बहुत ही सरल नियम पर काम करता है इस नियम को laws of planetary motion कहते हे. ईस नियम को वैज्ञानिक योहानेस केप्लर ने दिया था जिनके मुताबिक अगर कोई चीज किसी दुशरी चीज की परिक्रमा करती है तो वो उसके गति और वेग पर निर्भर करता है इसके साथ ये इनकी ऊंचाईयों पर भी निर्भर करता है है जैसे की हमने पहने देखा

     low earth orbit वाली सॅटॅलाइट पृथ्वी के करीब होने के कारण वो काफी अधिक तेजी से घूमते है वही दूसरी ओर medium earth ऑर्बिट वाले उपग्रह उनसे थोड़ी कम स्पीड पर घूमते है और लास्ट में high earth orbit वाले उपग्रहो का अंतर ज्यादा होने की वजह से वो काफी ज्यादा धीमे चक्कर लगाते है पहले दोनों के मुकाबले अब यहाँ पर रफ़्तार और ऊंचाई का सिद्ध संभंध होता है उन्हें अपनी कक्षा में लगने वाले बल में.

     इस का अगर में आपको एक example दू तो आप एक छोटी सी रस्सी लीजिए और उसके एक तरफ छोटा पत्थर बांधो और उसे गोल गोल घुमाओ अब देखेंगे की इसे घूमते रहने के लिए उसकी स्पीड अधिक होनी चाहिए अगर आप उसको थोडा धीमे करेंगे तो वो गोल घूमना बंध कर देंगे वैसे ही अब रस्सी को डबल कर लीजिए और उसे घूमाइए 
    इस बार आप देखेंगे की ये थोडा स्लो घूमेगा छोटी रस्सी के मुकाबले बस यही नियम भी काम करता है उपग्रहों पर जब उनकी ऊंचाई कम होती है तो उन्हें ज्यादा तेजी से घूमना पड़ता है जबकि दुरी ज्यादा होने पर उसे धीमे घूमना पड़ता है सतत घूमते रहने के लिए इसीलिए ये निचे नहीं गिरते 


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